एडवोकेट रणधीर कुमार ने 1993 बॉम्ब ब्लास्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट से प्राप्त किया समयबद्ध सुनवाई का आदेश
दिल्ली के अधिवक्ता रणधीर कुमार, जो दिल्ली उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करते हैं, ने हाल ही में वर्ष 1993 के बहुचर्चित बॉम्ब ब्लास्ट प्रकरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अपने मुवक्किल अब्दुल मुनाफ बाबा हलारी की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।
मामले के अनुसार, मुवक्किल को वर्ष 2020 में गुजरात के भुज से गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि वर्ष 1993 के बॉम्ब ब्लास्ट प्रकरण में उसने स्कूटर के माध्यम से तीन बमों की आपूर्ति की थी, जिनमें से एक विस्फोट में 27 लोगों की मृत्यु हुई थी। मामले का ट्रायल लंबित होने के कारण शीघ्र सुनवाई की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया गया।
एडवोकेट रणधीर कुमार ने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता हेगड़े सर के साथ विस्तृत कानूनी विचार-विमर्श के बाद सर्वोच्च न्यायालय में पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि मुवक्किल आर्थिक तंगी के कारण ऑफलाइन टिफिन पहुँचाने का कार्य करता था तथा उसे कथित रूप से ले जाए जा रहे सामान की वास्तविक प्रकृति की जानकारी नहीं थी।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम सुनवाई में नोटिस जारी किया और बाद में संबंधित ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मामले का निस्तारण तीन माह के भीतर किया जाए।
एडवोकेट रणधीर कुमार ने कहा कि उनके अब तक के अधिवक्ता जीवन में यह सबसे महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक है तथा इस मामले में समयबद्ध सुनवाई का आदेश मिलना उनके पेशेवर जीवन की एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
