उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026’ पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन

 

उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026’ पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन

देहरादून, 4 जुलाई 2026: उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) द्वारा आज ‘फ्री स्माइल फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला “ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 एवं बल्क वेस्ट जनरेटर्स (अधिक मात्रा में कचरा पैदा करने वाले संस्थानों) के लिए अनुपालन तंत्र” विषय पर आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन बोर्ड के मुख्य कार्यालय स्थित ‘कॉन्फ्रेंस हॉल (प्रथम तल), गौरा देवी पर्यावरण भवन, आईटी पार्क, देहरादून’ में सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक किया गया, जिसमें राज्य के विभिन्न हितधारकों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।
उद्घाटन एवं स्वागत सत्र:
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य पर्यावरण अभियंता श्री पी. के. जोशी के स्वागत संबोधन और उद्घाटन वक्तव्य के साथ हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने राज्य में नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को जमीनी स्तर पर लागू करने की आवश्यकता और इसके दूरगामी पर्यावरणीय लाभों पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही विशिष्ट अतिथियों एवं वक्ताओं का अभिनंदन (Felicitation) किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन (Moderation) एडवोकेट पार्थ उपाध्याय द्वारा किया गया, जिन्होंने उपस्थित अतिथियों का परिचय कराया और सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत की।
तकनीकी सत्र-I: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 और अनुपालन तंत्र
कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), नई दिल्ली के वैज्ञानिक ‘एफ’ एवं निदेशक श्री अनिल सी. रानवेकर उपस्थित रहे। उन्होंने नए ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026’ के कानूनी और तकनीकी पहलुओं की विस्तृत व्याख्या की। श्री रानवेकर ने स्पष्ट किया कि होटल, व्यावसायिक परिसर, शैक्षणिक संस्थान और बड़ी आवासीय सोसायटियों जैसे ‘बल्क वेस्ट जनरेटर्स’ (BWG) के लिए नियमों का अनुपालन करना अब अनिवार्य है। उन्होंने इन संस्थानों के लिए निर्धारित अनुपालन तंत्र और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रियाओं को विस्तार से समझाया। इसके उपरांत एक संवाद सत्र (Q&A Session) हुआ, जिसमें हितधारकों ने अपनी शंकाओं और चुनौतियों पर वक्ताओं से सीधा विमर्श किया।
तकनीकी सत्र-II: प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन एवं नवीन तकनीकें
द्वितीय तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए आईआईटी रुड़की (सहारनपुर परिसर) के पेपर और पैकेजिंग प्रौद्योगिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. कीर्तिराज के. गायकवाड़ ने ‘प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण की वर्तमान विभीषिका से निपटने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रीसाइक्लिंग तकनीकों पर जोर दिया। उन्होंने पैकेजिंग उद्योग में आ रहे बदलावों और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
कचरा पृथक्करण (Segregation) पर विशेष जोर:
कार्यशाला में पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए स्रोतों पर ही कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करने के संकल्प को दोहराया गया

 

* गीला कचरा (Wet Waste) – हरा डस्टबिन (खाद और जैविक उपयोग हेतु)
* सूखा कचरा (Dry Waste) – नीला डस्टबिन (रीसाइक्लिंग हेतु)
* सेनेटरी कचरा (Sanitary Waste) – लाल डस्टबिन (सुरक्षित निस्तारण हेतु)
* विशेष देखभाल कचरा (Special Care Waste) – काला डस्टबिन (घातक एवं ई-कचरे हेतु)
कार्यक्रम के समापन पर उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण अभियंता श्री अनिल पोखरियाल ने सभी मुख्य वक्ताओं, विशेषज्ञों, फ्री स्माइल फाउंडेशन के पदाधिकारियों और उपस्थित प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित (Vote of Thanks) किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला राज्य को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम का संचालन पार्थ उपाध्याय ने किया। अवधेश पुण्डीर, कैप्टन मोहित, सिमरन, पीयूष त्यागी एवं सिम्मी शर्मा सहित सैकड़ों की संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।

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