प्रो. दिनेश चमोला ‘शैलेश’* को *उत्कृष्ट बाल साहित्य सृजन* के लिए *‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान (मंगलेश डबराल पुरस्कार) 2025’* दिए जाने की घोषणा

 

देश के प्रख्यात हिंदी साहित्यकार, *साहित्य अकादमी* के *बाल साहित्य पुरस्कार* से सम्मानित, प्रो *. दिनेश चमोला ‘शैलेश* ‘ को उत्कृष्ट बाल साहित्य सृजन, सेवा एवं साहित्यिक योगदान के लिए *‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान (मंगलेश डबराल पुरस्कार) 2025’* दिए जाने की घोषणा हुई है।

संस्थान की निदेशक ने अपने 23 मार्च, 2026 के पत्र तथा आज दूरभाष से सूचना प्रदान करते हुए कहा है कि आपको अवगत कराते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि वर्ष 2025 के लिए प्रतिष्ठित *‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान (मंगलेश डबराल पुरस्कार)’* से आपको विभूषित किए जाने का निर्णय लिया गया है । गौरतलब है यह सम्मान उत्तराखंड के ऐसे कालजयी कवि, लेखक को दिया जाता है जिनकी रचनाएं जन मानस में निरंतर मानवीय मूल्यों को उदात्त करती हैं । उत्तराखंड के ऐसे तपस्वी साहित्यकार के बाल साहित्य सृजन, सेवा और साहित्यिक योगदान के लिए उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा यह श्रेष्ठ सम्मान प्रदान किया जाता है । इसके अंतर्गत सम्मान स्वरूप ₹1,51000/- सम्मान चिह्न, सम्मान पत्र और अंग वस्त्र दिया जाता है । यह सम्मान निकट भविष्य में एक *अलंकरण समारोह* में प्रदेश के *माननीय मुख्यमंत्री* द्वारा प्रदान किया जाएगा ।
प्रोफेसर चमोला विगत साढ़े चार दशकों से देश की असंख्य पत्र-पत्रिकाओं में अपने विविधमुखी लेखन के लिए जाने जाते रहे हैं । इनकी प्रकाशित सात दर्जन से अधिक पुस्तकों में से 55 से अधिक पुस्तकें केवल बाल साहित्य की विधाओं पर ही केंद्रित एवं प्रकाशित है । इससे पूर्व प्रो.चमोला देश की साहित्य अकादमी का बाल साहित्य पुरस्कार प्राप्त करने वाले सर्वप्रथम एवं सबसे कम उम्र के
साहित्यकार रहे हैं ।
ध्यातव्य है 14 जनवरी, 1964 को उत्तराखंड के *रुद्रप्रयाग* जनपद के *ग्राम कौशलपुर* में स्वर्गीय *पं. चिंतामणि चमोला* ज्योतिषी एवं *माहेश्वरी देवी चमोला* के घर में जन्मे प्रो. चमोला ने शिक्षा में प्राप्त कीर्तिमानों यथा एम.ए. अंग्रेजी, प्रभाकर; एम. ए. हिंदी (स्वर्ण पदक प्राप्त); पीएच-डी. तथा डी.लिट्. के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में भी
राष्ट्रव्यापी पहचान निर्मित की है। अभी तक प्रो. चमोला ने उपन्यास, कहानी, दोहा, कविता, एकांकी, बाल साहित्य, समीक्षा, शब्दकोश, अनुवाद, व्यंग्य, लघुकथा, साक्षात्कार, स्तंभ लेखन के साथ-साथ एवं साहित्य की विविध विधाओं में सात दर्जन से अधिक पुस्तकों में लेखन किया है । आपके व्यापक मौलिक साहित्य देश के अनेक विश्वविद्यालयों में पीएच-डी.तथा एम.फिल. स्तरीय कई शोध कार्य संपन्न हो चुके हैं तथा अनेक विश्वविद्यालयों में वर्तमान में चल रहे हैं ।
अभी तक अपनी उत्कृष्ट साहित्यिक सेवाओं के लिए आपको देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा ‘सहित्यश्री’, *’साहित्य भास्कर’, ‘विद्यासागर’, ‘युवा साहित्यकार सम्मान’,* *’साहित्य शिरोमणि सम्मान’, ‘उत्तरांचल रत्न सम्मान’ , ‘डॉ. गोविंद चातक सम्मान’, ‘उत्तराखंड शोध संस्थान* *सम्मान’, ‘बाल साहित्यकार सम्मान’ ‘संपादक शिरोमणि सम्मान’, ‘उत्कृष्ट बाल साहित्य पुरस्कार’, ‘हिंदी गौरव सम्मान’, ‘राष्ट्रीय राजभाषा शील्ड* *सम्मान’, ‘हिंदी भूषण सम्मान’, पंडित शिव शंकर दुबे स्मृति पुरस्कार’, ‘चंद्र कुंवर बर्त्वाल सम्मान’, ‘ परमार पुरस्कार’, तुरशन पाल पाठक* *बाल विज्ञान लेखन पुरस्कार’, ‘विवेकानंद सम्मान’, ‘राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान’,श्री श्याम सुधा परिमार्जन बाल* *साहित्य सम्मान’, ‘बाल साहित्य पुरस्कार’ (साहित्य अकादमी), ‘डॉ. राम जिनका किंकर सम्मान’, ‘डॉ. राष्ट्रबंधु सम्मान’* आदि अनेक सम्मान/पुरस्कार’ प्राप्त हुए हैं ।
आपकी चर्चित पुस्तकों में *‘यादों के खंडहर, ‘टुकडा-टुकड़ा संघर्ष, ‘प्रतिनिधि बाल कहानियां, ‘श्रेष्ठ बाल कहानियां, ‘दादी की कहानियां¸ नानी की कहानियां, माटी का कर्ज, ‘स्मृतियों का पहाड़, ‘क्षितिज के उस पार, ‘कि भोर हो गई,* *‘कान्हा की बांसुरी, ’मिस्टर एम॰ डैनी एवं अन्य कहानियाँ,‘एक था रॉबिन, ‘पर्यावरण बचाओ, ‘नन्हे प्रकाशदीप’, ‘एक सौ एक* *बालगीत, ’मेरी इक्यावन बाल कहानियाँ, ‘बौगलु माटु त….,‘विदाई, ‘अनुवाद और अनुप्रयोग, ‘प्रयोजनमूलक प्रशासनिक हिंदी, ‘झूठ से लूट’,* *व मिट्टी का संसार’;’गायें गीत ज्ञान विज्ञान के’ ‘मेरी 51 विज्ञान कविताएँ’ तथा ‘व्यावहारिक राजभाषा शब्दकोश’* आदि प्रमुख हैं। आपके संपादन में प्रकाशित बहुचर्चित हिंदी पत्रिका ‘ *विकल्प’* ने राष्ट्रीय स्तर पर अपने महत्वपूर्ण विशेषांकों के माध्यम से अपनी अलग पहचान अर्जित की है। डॉ॰ चमोला ने भारत सरकार में संयुक्त निदेशक (हिन्दी) सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया है तथा पूर्व में आप भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून में राजभाषा के प्रमुख रहे हैं तथा वर्तमान में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आधुनिक ज्ञान विज्ञान संकाय के पूर्व डीन, पूर्व निदेशक, IQAC, कुलानुशासक तथा भाषा एवं आधुनिक ज्ञान विज्ञान के अध्यक्ष रहे हैं । आप गढ़ विहार, फेज-1, देहरादून में रहते हैं ।
डॉ॰ चमोला ने देश के शताधिक विद्वानों के साक्षात्कार लिए हैं। अपने अनेक साक्षात्कार, रचनाओं का प्रसारण देश के 8 दूरदर्शन केंद्रों तथा 12 आकाशवाणी केंद्रों से प्रसारित हुए हैं । आप देश-विदेश की सैकड़ों पत्र-पत्रिकाओं के स्थापित लेखक हैं ।
आपके उपन्यास ‘टुकड़ा-टुकड़ा संघर्ष’ का कन्नड़ भाषा तथा अनेक रचनाओं का विभिन्न भारतीय देशी-विदेशी भाषाओं में अनुवाद एवं प्रकाशन हुआ

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