किसानों के उत्पीड़न के खिलाफ सांसद वीरेंद्र सिंह का तीखा विरोध,

स्मार्ट मीटर और बिजली कटौती पर सरकार को घेरा
चंदौली लोकसभा क्षेत्र के माननीय सांसद श्री वीरेंद्र सिंह ने आज संसद में किसानों और गरीबों के साथ हो रहे अन्याय एवं उत्पीड़न का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार की किसान विरोधी नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था किसानों को राहत देने के बजाय उन्हें लगातार आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान करने का माध्यम बनती जा रही है।
सांसद श्री सिंह ने कहा कि पहले न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों पर लाठियां और गोलियां चलवाई गईं तथा उन्हें अपमानित करने का प्रयास किया गया। अब सरकार ने बिना पूर्व सूचना और बिना सहमति के किसानों के घरों और नलकूपों पर स्मार्ट मीटर लगाकर प्रीपेड व्यवस्था लागू कर दी है, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के मनमाने ढंग से बकाया दिखाकर किसानों के घरों और कृषि नलकूपों की बिजली काटी जा रही है। यह व्यवस्था गरीब किसानों के शोषण का नया जरिया बनती जा रही है, जहां उन्हें अनावश्यक दबाव में डालकर वसूली की जा रही है।
सांसद श्री वीरेंद्र सिंह ने सदन में स्पष्ट रूप से कहा कि किसानों की आय मासिक नहीं होती है। किसान वर्ष में मुख्यतः रबी और खरीफ की फसलों के बिक्री के समय ही अपनी आमदनी प्राप्त करते हैं। ऐसे में उनसे हर महीने प्रीपेड बिजली भुगतान की अपेक्षा करना पूरी तरह अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है। किसान अपनी उपज बेचने के बाद ही बिजली बिल, सहकारी बैंकों का कर्ज और अन्य देनदारियों का भुगतान कर पाते हैं।
उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र चंदौली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बड़ी संख्या में किसानों को इस नई व्यवस्था के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिना किसी पारदर्शिता और पूर्व सूचना के बिजली कटौती की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे खेती-किसानी पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
माननीय सांसद ने सरकार से मांग की कि इस प्रकार की दमनकारी और अव्यवहारिक व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाई जाए, किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए लचीली और न्यायसंगत बिजली भुगतान प्रणाली लागू की जाए तथा बिजली विभाग की मनमानी पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अंत में श्री वीरेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों का शोषण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए वे सदन से लेकर सड़क तक संघर्ष जारी रखेंगे।

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